ब्लड सैंपल हेमोलिसिस होता है मतलब क्या होता है?
(Blood sample hemolysis hota hai matlab kya hota hai ?)
आपको ये क्यों पढ़ना चाहिए ?
अगर आपका मेडीकल क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है तो आप कहेंगे मुझे इसका क्या फायदा ?
और अगर आप एक मेडीकल फील्ड के हैं तो आपको ये मालूम होना बहोत जरूरी है ,
तो अगर आप मेडीकल क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है तो, आपको जब भी ब्लड चेकअप करने के लिए गए होंगे या आपके कोई रिश्तेदार के साथ गए होंगे तो आपने ये सुना होगा की उसका ब्लड सैंपल दुबारा लेना पड़ेगा क्यों की सैंपल लिया था वो हेमोलाइज हो गया ।
तो ऐसा क्यों होता है आज हम जानेंगे इसी विडियो में, विडियो को लाइक जरुर कीजिए दोस्तों ।
तो आज हम जानेंगे की ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने के कारण क्या क्या होते हैं।
ब्लड चेकअप करने के लिए पेशेंट का ब्लड सैंपल लेना पड़ेगा, इसके लिए आपको एक प्रॉपर नॉलेज की जरूरत होगी।
तो ब्लड सैंपल कलेक्शन कैसे करते हैं ये जानते हैं ,
सबसे पहले पेशेंट का आइडेंटिफिकेशन करना पड़ेगा , बाद में पेशंट के बाजू से ब्लड सैंपल लेना होगा ।
उसके बाद ट्यूब में उसे डालना होगा ।
ये होता है ब्लड सैंपल कलेक्शन ।
ये तो सब ठीक है लेकिन ब्लड सैंपल हेमोलाइज क्यों होता है भाई ? लेकिन इसमें गलत क्या हो सकता है, तो चलिए में बताता हूं ,
१. पेशेंट को टोरनी कुवैट बांधते समय उसे टाइट करे लेकिन २ मिनिट से ज्यादा न बांधे इससे ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने का चांसेज बढ़ जाते हैं ।
२. दूसरा कारण हैं , जब आप सैंपल कलेक्शन करने से पहले स्पिरिट लगाते है, तब उसे पूरी तरीके से सुखाने दे , वरना वो ब्लड मैं मिक्स हो जायेगा और आरबीसी को खराब करेगा या कहिए तोड़ देगा, या सिंपल भाषा में कहे तो टुकड़े टुकड़े कर देगा ।
३. निडिल को एक बार प्रिक करने के बाद ब्लड नहीं आता तो, वो फिर से उसी पेशेंट को दुबारा प्रीक करते समय उसी नीडल से प्रिक करते है, जो की नही करना चाहिए उसे दूसरी नीडल से बदले।
४. प्रिक करने के बाद सिरिंज के पिस्टन को जोर से न खींचे इससे सैंपल हेमोलाइज होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।
५. जब आप ट्यूब में सैंपल डाल रहे हो तो धीरे से डाले या फिर निडिल निकाल कर ट्यूब का ढक्कन खोल कर धीरे से सैंपल डाले जो की २ एमएल सैंपल होना चाहिए ।
६. सैंपल मिकसिंग कार्तेसमय स्लो लि करे ज्यादा जोर से ना करे और जिस ट्यूब को मिक्स करने की जरूरत है उसे ही मिक्स करें।
७. अगर आप सैंपल को एक जगह से दूसरी जगह लेके जा रहे हो तो, उसे उचित टेंपरेचर यानी २ डिग्री से लेकर ८ डिग्री के बीच में सैंपल को रखना चाहिए तभी उस सैंपल के रिजल्ट अच्छे से आयेंगे, वरना वो सैंपल हेमोलाइज होंगे, और उसके रिजल्ट गलत आयेंगे।
८. लैब में सैंपल आने के बाद उसे सेंट्रीफ्यूज करते वक्त उसका बैलेंस करना उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि उसका हेमोलाइज होने का खतरा टल जाए।
अगर आपके सेंट्रीफ्यूज का RPM ३००० से ज्यादा हैं तो
जबरदस्ती हम आरबीसी को नीचे बिठा रहे हैं, तब भी वह फूट सकती है और। सैंपल हेमोलाइज हो सकता है।
आज मैंने आपको लैब में ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने के एरर बताए जिसे प्री एनालिटिक एरर भी कहते हैं।
९. अगर आपको लगता है इसके अलावा भी कोई कारण हो सकते है, तो हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं, और लाइक जरुर करे, ताकि ये विडियो आप की तरह किसी और को हेल्प करे ।
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