A pathology laboratory is a platform where information related to blood tests is shared. The blog may cover topics such as what blood tests are, why they are performed, how they are conducted, what the results mean, and how to prepare for a blood test. The blog may also provide insights into various types of blood tests, including basic blood tests, specialized blood tests, and genetic testing.
टेस्ट के लिए ब्लड कलेक्शन कैसे करें - सीरिंज विधि हिंदी मै |
हम सबसे पहले है कि रक्त संग्रह के लिए क्या आवश्यक है, ऐसा कौन है जो टेस्ट रखना है फोन का संग्रह ट्यूब का चयन है जैसे – ईडीटीए, साइट्रेट, फ्लूराइड | और एमएल ब्लड की तरह की रिपोर्ट्स सिरिंज जैसे - 3 मिली, 5 मिली, 10 मिली.
मांग :
1. टेस्ट ट्यूब
2. टूर्निकेट
3. आत्मा
4. कपास
5. सिरिंज
Blood Collection :
1. सबसे पहले रोगी को रक्त संग्रह कुर्सियों पर आराम से बैठने और अपने हाथ के दस्ताने पहनने के लिए तैयार हो जाओ | सभी आवश्यकताओं को ठीक करने के लिए अपने दैनिक उपयोग के लिए टूर्निकेट को वार्पल कोहनी का जोड़ से कड़ा लपेटे...!
2. रोगी से रोग को ठीक करने के लिए निर्धारित किया जाता है कि नसों में रक्त भरने की नसें ऊभर जगह में होती हैं, अंतिम रक्त संग्रह फ़ॉसी नस नस रक्त संग्रह या अपनी सुविधा की सुविधा चुनने के लिए |
3. अब स्पिरिट स्वैब से वहां कि स्किन को क्लीन कर लें |
4. बाएँ हाथ के नस में रक्त संग्रह करने के लिए , यह नस की सुई इंजेक्षन पर्ची हो और दाएँ हाथ से सिरिंज में सुई को नस में इंजेक्ट करें, सिरिंज में रक्त संचार होता है. ढील देने के लिए, असफल होने के लिए |
5. खून के बाद, सिरिंज को उतारें और बाहर निकाल लें बाएं हाथ से स्पिरिट स्वाब से लें, टूर्निकेट को बाहर लें, रोगी के कोहनी के जोड़ को मोड़ने के लिए बोलें, तो हेमेटोमा न बने |
6. अब हम सिरिंज से सुई को अलग कर रहे हैं और संग्रह ट्यूब में रक्त को स्थानांतरित करने के लिए ट्यूब को हलके से हो कर मिक्स कर रहा है | अब हमारा रक्त संग्रह पूरा हो गया |
टेस्ट के लिए ब्लड कलेक्शन कसे - सीरिंज विधिमराठी मध्ये
आम्ही सर्वात प्रथम रक्त संग्रहासाठी काय आवश्यक आहे, ते कोण आहे जो तपासा फोनचा संग्रह ट्यूब निवडा जसे – ईडीटीए, साइट्रेट, फ्लूराइड | आणि एमएल ब्लड की रिपोर्ट्स सिरिंज सारखे - 3 मिली, 5 मिली, 10 मिली.
मागणी :
1. चाचणी ट्यूब
2. टुरिकेट
3. आत्मा
४. कपास
५. सिरिंज
रक्त संकलन:
1. सर्वात प्रथम रोगी को रक्त संग्रह कुर्सियों पर आराम से बैठने और अपने हाथ के दस्ताने पहनने के लिए तैयार हो जाओ | टुरिकेट को वर्पल कोहनी का जोडून कड़ा लपेटे ...!
2. रोगाच्या रोगास ठीक करण्यासाठी निर्धारित केले गेले आहे की नसोंमध्ये रक्त भरणे नसणे तेथे भरलेले असते, अंतिम रक्त संग्रहण फ़ॉक्स नसलेले रक्त संग्रहित करण्यासाठी आपल्या सुविधा निवडणे |
3. अब स्पिरिट स्वैब से पहले कि स्किन को क्लीन करा |
4. बाएँ हाथ के नसमध्ये रक्त संग्रह करण्यासाठी, यह नस की सुई इंजेक्षन पर्ची हो आणि दाएँ हाथ से सिरिंज में सुई को नसून इंजेक्ट करा, सिरिंजमध्ये रक्त संचार होता. ढील देणे, असफल होणे |
5. खून के बाद, सिरिंज कोंडें आणि बाहेर काढा बाएं हात से स्पिर स्वाब से लें, टूर्केट को लें, रोगी के कोहनी को मोड़ने बोलें, हेमेटोमा न बनता |
6. अब हम सिरिंज से सुई को अलग कर आणि संग्रह ट्यूब मध्ये रक्त कोश करण्यासाठी ट्यूब को हल से मिक्स कर रहा है | अब हमारा रक्त संग्रह पूर्ण झाला |
(Blood sample hemolysis hota hai matlab kya hota hai ?)
आपको ये क्यों पढ़ना चाहिए ?
अगर आपका मेडीकल क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है तो आप कहेंगे मुझे इसका क्या फायदा ?
और अगर आप एक मेडीकल फील्ड के हैं तो आपको ये मालूम होना बहोत जरूरी है ,
तो अगर आप मेडीकल क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है तो, आपको जब भी ब्लड चेकअप करने के लिए गए होंगे या आपके कोई रिश्तेदार के साथ गए होंगे तो आपने ये सुना होगा की उसका ब्लड सैंपल दुबारा लेना पड़ेगा क्यों की सैंपल लिया था वो हेमोलाइज हो गया ।
तो ऐसा क्यों होता है आज हम जानेंगे इसी विडियो में, विडियो को लाइक जरुर कीजिए दोस्तों ।
तो आज हम जानेंगे की ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने के कारण क्या क्या होते हैं।
ब्लड चेकअप करने के लिए पेशेंट का ब्लड सैंपल लेना पड़ेगा, इसके लिए आपको एक प्रॉपर नॉलेज की जरूरत होगी।
तो ब्लड सैंपल कलेक्शन कैसे करते हैं ये जानते हैं ,
सबसे पहले पेशेंट का आइडेंटिफिकेशन करना पड़ेगा , बाद में पेशंट के बाजू से ब्लड सैंपल लेना होगा ।
उसके बाद ट्यूब में उसे डालना होगा ।
ये होता है ब्लड सैंपल कलेक्शन ।
ये तो सब ठीक है लेकिन ब्लड सैंपल हेमोलाइज क्यों होता है भाई ? लेकिन इसमें गलत क्या हो सकता है, तो चलिए में बताता हूं ,
१. पेशेंट को टोरनी कुवैट बांधते समय उसे टाइट करे लेकिन २ मिनिट से ज्यादा न बांधे इससे ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने का चांसेज बढ़ जाते हैं ।
२. दूसरा कारण हैं , जब आप सैंपल कलेक्शन करने से पहले स्पिरिट लगाते है, तब उसे पूरी तरीके से सुखाने दे , वरना वो ब्लड मैं मिक्स हो जायेगा और आरबीसी को खराब करेगा या कहिए तोड़ देगा, या सिंपल भाषा में कहे तो टुकड़े टुकड़े कर देगा ।
३. निडिल को एक बार प्रिक करने के बाद ब्लड नहीं आता तो, वो फिर से उसी पेशेंट को दुबारा प्रीक करते समय उसी नीडल से प्रिक करते है, जो की नही करना चाहिए उसे दूसरी नीडल से बदले।
४. प्रिक करने के बाद सिरिंज के पिस्टन को जोर से न खींचे इससे सैंपल हेमोलाइज होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।
५. जब आप ट्यूब में सैंपल डाल रहे हो तो धीरे से डाले या फिर निडिल निकाल कर ट्यूब का ढक्कन खोल कर धीरे से सैंपल डाले जो की २ एमएल सैंपल होना चाहिए ।
६. सैंपल मिकसिंग कार्तेसमय स्लो लि करे ज्यादा जोर से ना करे और जिस ट्यूब को मिक्स करने की जरूरत है उसे ही मिक्स करें।
७. अगर आप सैंपल को एक जगह से दूसरी जगह लेके जा रहे हो तो, उसे उचित टेंपरेचर यानी २ डिग्री से लेकर ८ डिग्री के बीच में सैंपल को रखना चाहिए तभी उस सैंपल के रिजल्ट अच्छे से आयेंगे, वरना वो सैंपल हेमोलाइज होंगे, और उसके रिजल्ट गलत आयेंगे।
८. लैब में सैंपल आने के बाद उसे सेंट्रीफ्यूज करते वक्त उसका बैलेंस करना उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि उसका हेमोलाइज होने का खतरा टल जाए।
अगर आपके सेंट्रीफ्यूज का RPM ३००० से ज्यादा हैं तो
जबरदस्ती हम आरबीसी को नीचे बिठा रहे हैं, तब भी वह फूट सकती है और। सैंपल हेमोलाइज हो सकता है।
आज मैंने आपको लैब में ब्लड सैंपल हेमोलाइज होने के एरर बताए जिसे प्री एनालिटिक एरर भी कहते हैं।
९. अगर आपको लगता है इसके अलावा भी कोई कारण हो सकते है, तो हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं, और लाइक जरुर करे, ताकि ये विडियो आप की तरह किसी और को हेल्प करे ।
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